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Yashwant Rathore

Abstract Romance Fantasy

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Yashwant Rathore

Abstract Romance Fantasy

हम तुम कभी एक हो  नही पाते

हम तुम कभी एक हो  नही पाते

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हम तुम कभी एक हो नहीं पाते

उस मोड़ पर जो न साथ आते


राह में आते जाते तो काफी है

कुछ हि पे क्यूँ घड़ी रुक सी जाती है

गर मिल के ऐसे ही लड़ जाते

हम तुम कभी एक हो नहीं पाते


वो था शमा कुछ ख़ास क्या कहें

रुक रुक जिया भी काम सा बहे

अब पास आओ किसी भी नाते

हम तुम कभी एक हो नहीं पाते


वह जो हसी है,दिल में बसी है

अब आस तेरी, मन में जगी है

दिन भी हसीं, हसीं है अब राते

हम तुम कभी एक हो नहीं पाते


यकीं है मुझे कोई मेरा हैं

बस तेरी यादों का ही घेरा है

खुद से ही होती है तेरी बातें

हम तुम कभी एक हो नहीं पाते।


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