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Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

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Dr.SAGHEER AHMAD SIDDIQUI डॉक्टर सगीर अहमद सिद्दीकी

Romance

हक बोलते हैं सच पर निदामत

हक बोलते हैं सच पर निदामत

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हक बोलते हैं सच पे निदामत नहीं करते।

दिल तोड़ दिया फिर भी शिकायत नहीं करते।


मुझको जो मिला है मुकद्दर की बात है।

हम तो पराई चीज पर हसरत नहीं करते।


हासिल करेंगे एक दिन मेहनत से मंजि़लें।

बर्बाद हम मां बाप की दौलत नहीं करते।


अब दोस्त भी शामिल है दुश्मन की सफो में।

यह सोचकर नासाज तबीयत नहीं करते।


आंखों में उसका प्यार है और दिल में ऐतबार।

फिर भी हम तेरे न पर शिकायत नहीं करते।


अल्लाह की वह़दानियत ईमान मेरा है।

हम इसलिए गै़रों की इ़बादत नहीं करते।


नबियों की है मीरास "सगीर" इल्म और अमल।

इसके सिवा हम कोई वसीयत नहीं करते।


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