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Monika Jayesh Shah

Romance

4  

Monika Jayesh Shah

Romance

हीर रांझणा की प्रेम कहानी

हीर रांझणा की प्रेम कहानी

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रांझणा मुश्किल है.. बहुत पर मुमकिन नहीं।

आसान हैं.. बहुत पर कोई अधिकार नहीं...

हीर को जताना है..मोहब्बत में प्यार पर

रांझणा उसकी क़िस्मत में वो प्यारा मिलन ही नहीं...

हीर की आखों में आंसू है.. पर हिम्मत नहीं..

हीर का बेवफ़ा बन वफ़ा में प्यार करना..

उसकी इज़्ज़त हमारी है..पर इजाज़त नहीं..

हीर को कोन क्या समझेगा हमे मालूम नहीं..

ये इश्क सच्चा है. हमारा हीर और रांझणा की तरह..

समझ लेना पर किस्मत में कभी रांझणा

हमारी दोस्ती कभी हीर को आजमाना नहीं..

हीर को फिक्र बहुत है.. इन लबों पर .. पर जिक्र कभी नहीं...

हीर खामोश है.. हमारा आशियाना.. अब तक

पर अब रांझणा दिल में हमारे कोई अफसोस नहीं.!

लिखती हूं..नज़राना प्यार भरा गीत.. तुम्हारे लिए..

मेरी हर एक कविता के कहानीकार हो तुम..

इससे ज्यादा क्या वफ़ा की उम्मीद करोगे.. की

हीर जिंदा है.. पर हमारे ह्रदय में सास अब बाकी नहीं..

रांझणा मुश्किल बहुत है..... पर नामुमकिन नहीं!

हीर धन्यवाद करती हैं ..रांझणा.. तुम्हारा में.. हमेशा..

हीर के प्यार को हमेशा वफ़ा में सजा कर रखा..

अब और कुछ ख्वाहिश नही हमें.. हमारे रांझणा से..

ये वचन है... हीर का तुम्हारी हैं.. थीं और हमेशा रहेगी!

ये इश्क_ इश्क हैं ..हीर रांझणा की दासता हैं!

जो हमनें हीर बन अपने रांझणा को सुनाई हैं!

बस यहीं कविता हमने हीर –रांझणा पर आज बनाई हैं!


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