STORYMIRROR

Rameshwar Bishnoi 007

Abstract

2  

Rameshwar Bishnoi 007

Abstract

हिचकियां

हिचकियां

1 min
85

न जाने आज किस के दिल में हलचल हुई है,

बड़े दिनों बाद आज हिचकियां आई हैं।

मेरे दिल में खुशियां छाई हुई हैं,

कई दिनों बाद उसकी याद आई हैं।।

वो आती हैं हिचकियों के रुप में....

कमबख्त दो घूंट पानी से गायब हो गई।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract