me Basant
Abstract
हे सखी
देखा है हमने
हमारी ही तरह
टहनियों पर
मुस्कुराते फूलों को
सूखकर झरती
पंखुड़ियों को
कुचली जाती कलियों को
मधुबन को मदहोश करती
सुगंध को
काश हम
कमल होते
कीचड़ में खिलते
किसी के हाथ
न आते
हमने देखा-
बीती रात प्रकृति में
अनेकों कमल दल
फूल - फूल
मुस्काये।
हत्यारे
नदी की आत्म...
बैल को हमने
एक और एक ग...
पत्र जो लिख...
कौन हो तुम
प्यार
डस्टबिन
पाप का घड़ा
जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस धर्म दस द जैन धर्मी अनुयायी करे जैन धर्म चिंतन, हर्षोल्हास से मनाकर पर्युषण पर्व, दस ...
चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते। चॉक्लेट चूरन तेल साबुन खबरों वाले अब अख़बार नहीं होते।
जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूरा करते दे जब मैं बोल भी नहीं पाता था.. सिर्फ़ मेरे इशारों से मैंने उन्हें हर ख्वाहिश पूर...
इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई। इसके प्रभाव से सामाजिक उत्थान हुआ एक दौड़ की परिधियों के पार हुई।
यह मुझे समझ नहीं आता इतना समझने की जरूरत भी क्या है यह मुझे समझ नहीं आता इतना समझने की जरूरत भी क्या है
आजादी का मतलब क्या है हम आप जानते हैं? आजादी का मतलब क्या है हम आप जानते हैं?
द्रौपदी की करुणा पुकार क्यों नहीं सुन पा रहे हो? द्रौपदी की करुणा पुकार क्यों नहीं सुन पा रहे हो?
हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया । हर दिल में होती है एक ख्वाबों खयालों की दुनिया ।
अभी नहीं मालूम जीवन की कड़वी सच्चाइयां अभी नहीं मालूम जीवन की कड़वी सच्चाइयां
पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो। पाँव अब रुकने नहीं हैं चाहे झँझावात हो।
गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक महसूस किय गुलामी की बेड़ियों को हमने कई वर्षों तक सहा है, क्या होती गुलामी लंबे समय तक ...
दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है। दे जाती है मुझे शब्द और मेरी कल्पना का अविरल रूप बन जाती है।
कई शासक तो युद्ध शिविरों में, करते शामिल नच लड़कियों को, कई शासक तो युद्ध शिविरों में, करते शामिल नच लड़कियों को,
सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं सूरज की किरणों से आज, स्वयं नग्न जल जाऊं मैं
तब राम का नाम जुबां पे आता तो है फिर भी वह सत्य को झुठलाता है तब राम का नाम जुबां पे आता तो है फिर भी वह सत्य को झुठलाता है
ये पिंजरा ना भाता मुझको मुझे तिनकों का नीड़ बनाने दो ये पिंजरा ना भाता मुझको मुझे तिनकों का नीड़ बनाने दो
तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में, तेरा बुत बनू और बंद रहूँ मंदिर के तालों में,
प्यार लुटाने वाला ही जग में आकाश कहा जाता है। प्यार लुटाने वाला ही जग में आकाश कहा जाता है।
अपने आपको ही बेवकूफ बनते हैं खुद ही खुद को गुमराह करते हैं अपने आपको ही बेवकूफ बनते हैं खुद ही खुद को गुमराह करते हैं