हे माँ दुर्गा..
हे माँ दुर्गा..
हर संकट को दूर करे माँ
ओ पहाड़ों माँ शेरों वाली
हृदय हमारे आन बसों
ओ संकट हरने वाली।
हृदय में बसती भक्ति तुम्हारी
नित मैं तेरी राह निहारूँ
सुबह शाम बस तेरी आराधना
मैं हर दिन तुझे पुकारूँ।
नव रूप धरे तू नवरात्रि में
हर रूप की महिमा न्यारी
मधुर संगीत माँ के चरणों में
जय दुर्गे खप्पर धारी।
सिंह विराजे अष्ट भुजाओं वाली
दुष्टों का संहार करे
तेरे भक्तों पर जब पीर पड़े
माँ दुर्गा ही उद्धार करे।
नहीं मांगते हीरा मोती
नहीं मांगते चांदी सोना
हम तो मांगे माँ तेरे चरणों में
बस छोटा सा एक कोना।
नवरात्रि के इस पर्व में हम सब
माँ दुर्गा को चुनर चढ़ाते हैं
हार शृंगार कर अपने हाथों से
माँ दुर्गे को हम सजाते हैं।
ओ करुणामई अमृत बरसाने वाली
माँ तेरी महिमा अपरंपार
जो सच्चे दिल से तेरा ध्यान धरे
माँ कर दे तू उसका बेड़ा पार।
