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Pratibha Jain

Abstract

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Pratibha Jain

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हास्य

हास्य

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बालीबुड का असर

 पिताजी को डेड कहे,

 माता अब मोम बनी,

 पश्चिम का दौर है।


आधी रात ड्रिंक चलें,

 सुबह गर्ल फ्रेंड मिले,

 बॉयफ्रेंड हसबेंड,

 बातें रसबोर है।


सभ्यता गए है भूल

 परिधान प्रतिकूल

 फटे जींस पैंट हाफ

 शर्ट शार्ट शोर है।


प्रतिभा शरमाय रही,  

सबको समझाय रही।

मानता नहीं है कोई,

ऐसे बरजोर है।



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