हाँ मैं एक शिक्षक हूँ
हाँ मैं एक शिक्षक हूँ
तुम आए जब नन्हें कदमों से तुम्हारी उँगली मैंने थामी थी,
हर पल साथ रहा तुम्हारे मन की जिज्ञासाएँ मैंने जानी थी।
बचपन से जवानी तक का सफर तुमने मेरे संग बिताया है,
हर एक पल को सजाकर उज्ज्वल भविष्य तुम्हारा बनाया है।
चाक डस्टर चलाते समय जाने कब खुद चाक से भर जाता हूँ,
मेरे पढ़ाये पाठ को समझ जाते सभी तो मैं फूला नहीं समाता हूँ।
घर से विद्यालय का सफर माता –पिता ने तुम्हें सिखाया है,
ज्ञान का दीप जलाकर पूरे समाज से मैंने तुम्हें मिलाया है।
पढ़ाने और सिखाने के लिए तत्पर रहता न थकता न ही रुकता,
तुम्हें पढ़ाने के लिए मैंने आज डिजिटल से भी हाथ मिलाया है।
मुश्किल के समय कभी न घबराना हिम्मत से काम लेना तुम,
और जीवन की हर रुकवटों से लड़ना मैंने तुम्हें सिखाया है।
सबके लिए सोचता मैं एक शिक्षक हूँ मेरा कोई अलग धर्म नहीं
सबसे हमको मिलजुलकर रहना हमेशा यही मैंने ही सिखाया है।
तुम्हारे गलत व्यवहार और शरारत के लिए मैंने तुम्हें डांटा है
और कभी कभी प्यार से तुम संग बैठकर बहुत कुछ समझाया है।
जाने कितनी ही प्रतिभाओं का अंकुर बोया है मैंने इस उपवन में,
अज्ञान का घोर अंधकार हटाकर ज्ञान का दीप मैंने जलाया है।
