गुरुकुल
गुरुकुल
गुरुकुल की है रीत पुरानी शिष्य विद्यार्जन करते थे
गुरू की सेवा कर समिप ग्राम मे भिक्षा लेने जाते थे
राजा हो या रंक वहां पर सारे संग संग रहते थे
जो भी शिक्षा मिले गुरु से सविनय ग्रहण करते थे
गुरु और गुरु माता का वहां रहता था बहुत ही मान
वह भी निस्वार्थ मन से शिष्य को देते थे संपूर्ण ज्ञान
आज के युग मे जो देते है विद्यादान होकर निष्काम
गुरुपूर्णिमा की बेला पर सभी गुरुजन को सादर प्रणाम।
