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Arun Gode

Inspirational

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Arun Gode

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गुरु नानक्देवजी.

गुरु नानक्देवजी.

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पाखंडी वर्णव्यवस्था का चरम पर था चलन,

शुद्र बहुजनों के लिए एक आशा की किरण.

ननकाना साहिब पंजाब में हुआ नानक का आगमन,

चारों तरफ रोशन हुआ हमारा चमन.


मृत धार्मिक सनातन प्रथाओं का नहीं किया जतन,

पिडीत बहुजनों के लिए अलग धर्म किया स्थापन.

संसार के लिए एकेश्र्वरवाद का बताया सिध्दांत,

सभी मानव में ईश्र्वर का हैं अंश और स्थान.


सिख धर्म का है दुनिया में पाचवां स्थान,

सभी अनुशाषित शिष्य ईश्र्वर के लिए एक समान.

गुरुद्वारा में नहीं ऊंचा नीचा भक्तों का स्थान,

सभी भक्तोंके लिए गुरुद्वारा में लंगरका आयोजन.


सभी भक्त बिना भेदभाव किये, लेते पंक्ति में भोजन,

लंगर में नहीं होता जात-पात, धर्म के आधार पर विभाजन.

गुरुद्वारा में सभी भक्तों के लिए एक्समान बंधन,

सभी भक्तों को करना है सक्ती से नियमों का पालन. 


श्री गुरु नानक्देवजी का है प्रथम गुरु का स्थान,

दसवे गुरु गोबिंद सिंग का अंतिम स्थान. 

श्री गुरुग्रंथ साहिब जी है सिख धर्मका पवित्र ग्रंथ,

सिख अनुयायी के लिए गुरुग्रंथ गुरु समान.


श्री गुरुग्रंथ साहिबजी में दसों गुरु ज्ञान,

ग्रंथ में है समकालीन संतो का भी प्रबोधन.

दसों गुरु के शिक्षा का श्री गुरुग्रंथ में एकत्रीकरण,

संत नामदेव,हजर्त बाबा फरिद के भी भजन-किर्तन.


वंचित,पिडीत ,प्रताडीत, कमजोर , उपेक्षित ,हिन,

सिख धर्ममें ईन के सुरक्षा हेतु खालसा पंथका प्रयोजन.

क्रोध,लालच अनुराग,अभिलाषा और अभिमान,

ये सभी है मानवी बुरे कर्म,मोक्ष प्राप्ती में अडचण.

सत्यजीवन, धर्म, अध्यात्म पर श्री गुरु नानक करे प्रवचन, 

न्याय, समता,सहिष्णुता पर भजन-किर्तन.


श्री गुरु नानक देव बहुजनों के दिपस्तंभ,

करतारपुर पंजाब में नानकजीका स्वर्गगमन.

सिख धर्मियोंको पंच वस्तु उपयोग का बंधन,

पगडी,कंगी,कडा, सुति कच्छा और किरपन.


जन्म.मृत्यु,शादी,नामकरण संस्कार अनुयोजन,

गुरु व्दारा में होते है सिख अनुयायों के आयोजन.

सिख समुदाय मनाते धुम-धाम से वैसखि पर्व,

गुरु नानक जंयती मनाते, प्रथम गुरु के स्मरण.



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