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Nand Kumar

Inspirational


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Nand Kumar

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गुरु महिमा

गुरु महिमा

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गुरू एक निर्झर जिससे नित ,

ज्ञान प्रेम की बहती धार ।

श्रद्धा  विनय भक्ति जो करता , 

पाए आशीष ज्ञान अपार ।।


अज्ञान कपट सब कष्ट हरे ,

बन दीप सदा तम दूर करे ।

सन्मार्ग दिखाकर जीवन में , 

गुरू ही सबको भव पार करे ।।


जब जीवन नौका हो डगमग , 

पतवार गुरू बन जाता है ।

संकट से बचाकर हम सबको , 

गुरू ही दायित्व निभाता है ।।


बन कुम्भकार हर खोट सकल ,

मिट्टी से सुपात्र बनाता है ।

सद्ज्ञान धौकनी जला जला ,

कुन्दन सा मूल्य बढाता है ।।


गुरू सत्ता दिव्य है जीवन की , 

सबने ही शीष झुकाया है ।

शत कोटि नमन गुरू चरणों में, 

जिन जीवन को महकाया ।।



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