गुरु का महत्व.....।
गुरु का महत्व.....।
आसमां तारों बिन सूना है,
मछली जल बिना तड़पती हैं,
बच्चा मां बिन रोता है,
मां ममता का सुखद अनुभव के लिए तरसती है,
उसी प्रकार एक शिष्य गुरु बिन अधूरा है,
शिष्य वो माटी है जिसे आकार गुरु देता है,
कभी डांट के कभी पुचकार के,
वो उसको संघर्ष करना सिखाता है,
बिना गुरु ज्ञान नहीं न मिलती मंजिल है,
गुरु तो साक्षात् परब्रह्म है,
उसके बिना शिष्य का कोई मतलब नहीं,
गुरु न केवल सांसारिक ज्ञान देता,
वरन् हमें शिष्टाचार अनुशासन में रहना सिखाते है,
गुरु के बिना न भूत है न भविष्य है,
बस जीवन नैया अंधकारमय है,
गुरु का मोल वहीं समझता,
जो करता गुरु का सम्मान है,
जो जानता गुरु की महत्ता,
उसका शिष्य के जीवन में महत्व।
