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aazam nayyar

Abstract Tragedy

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aazam nayyar

Abstract Tragedy

गुफ़्तगू कर लें प्यार की

गुफ़्तगू कर लें प्यार की

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हू -ब - हू वो यार लगता चाँद है!

दिल फ़िदा ये जिसका चेहरा चाँद है 


कल ख़ुशी का दिन भरा होगा यहां 

ईद का ए यारों निकला चाँद है 


तन्हाई के ही अंधेरे मिट जाते 

जब गली में मेरी आता चाँद है 


दिल करे अपना बना लूँ हम सफ़र 

हाँ मगर जो चेहरा देखा चाँद है 


रोशनी ऐसी थी उस चेहरे की 

की जमीं पे जैसे उतरा चाँद है 


भेज रब जीवन में आज़म की उसको

रु ब रु जो चेहरा बैठा चाँद है 


  Aazam nayyar 


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