गुपचुप
गुपचुप
कल एक दावत जमकर खाई,
हमें पानी पूरी बहुत पसंद आई।
थोड़ा नमक डाला थोड़ी खटाई,
जीरा, हींग से होती पानी की बनाई।
खट्टी, मीठी, चटपटी सब तरह के,
पानी को भर के जाती है पिलाई।
दस रुपए में जाती हैं पांच पिलाई,
दिल्ली खाई तो पांच तीस की आई।
पानी पूरी पिलाने में सबसे ज्यादा,
थक जाती है सीधे हाथ की कलाई।
थैली भर के पानी पूरी यदि घर आई,
समझ लो कि कोई कार्यक्रम है भाई।
शाम रोज पानी पूरी वाला आता है,
चिल्लाता है पानी पूरी पी लो भाई।
किसी दिन मम्मी ने नहीं पिलवाई तो,
बच्चे रो के कहते पिलवा दो अच्छी ताई।
अंत में जब सुखी पुरी जाती है खिलाई,
तब नमक सौंठ उस पर लगाते हैं भाई।
