गुज़र गई
गुज़र गई
हुस्न ए जान ओ दिल सरे आम गुज़री है
शब से सुबह सुबह से शाम गुज़री है
सर ए तूर हो केह हो वीराना ओ सेहरा
दीदार ए यार मुल्क ए आवाम गुज़री है
कफस में चुप है हुस्न में गिरफ्तार परिंदे
राह ए कफस से दिल ए आराम गुज़री है
रकीब हाथों में लिए है शराब ओ सुबु
मयखाने से आज़ निगाह ए जाम गुज़री है।

