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MS Mughal

Romance

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MS Mughal

Romance

गुज़र गई

गुज़र गई

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हुस्न ए जान ओ दिल सरे आम गुज़री है 

शब से सुबह सुबह से शाम गुज़री है 


सर ए तूर हो केह हो वीराना ओ सेहरा 

दीदार ए यार मुल्क ए आवाम गुज़री है 


कफस में चुप है हुस्न में गिरफ्तार परिंदे 

राह ए कफस से दिल ए आराम गुज़री है 


रकीब हाथों में लिए है शराब ओ सुबु 

मयखाने से आज़ निगाह ए जाम गुज़री है।


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