गणतंत्र दिवस फिर आया है
गणतंत्र दिवस फिर आया है
आज छब्बीस जनवरी एतिहासिक पावन,
बड़ा ही शुभ गणतंत्र दिवस हमारा है !
आज संपूर्ण जगत में गूॅ॑ज रहा,
देखो कैसे गौरव गान हमारा है !
सुमधुर यह यशगान कुछ श्वानों को,
बिल्कुल नहीं सहा जा नहीं रहा है !
लोगों को भ्रमित कर सदा भडकाना ही,
उनका शगल सा बन आया है !
भारत को गणतंत्र बनाने को,
वीर शहीदों ने अपना रक्त बहाया है !
महान् है गणतंत्र हमारा रक्षा हित जिसका,
हमने विराट संविधान बनाया है !
यश,कीर्ति,सुख,दुःख सौगातों की सौगातों को,
अपने हृदय मेँ बसाया है !
संविधान सहयोग से हम किसी को गणतंत्र का,
सर्वोपरि शक्तिमान सुझाया है !
उसी की अलौकिक जन शक्ति सृजनता से,
हमने देश को सबसे आगे बढ़ाया है !
भारत माता का सपूत प्रतापी गणतंत्र की रक्षा हित मेँ,
प्राण तक न्यौछावर कर आया है !
दुश्मन की दाल हम कभी न गलने देंगे,
आतंकियो और आता ताइयों को हमने धमकाया है !
गणतंत्र रहेगा अमर अजर और निर्भीक सदा,
माॅ॑ के चरणों की धूल हममे मस्तक पर लगाया है !
गणतंत्र, प्रजातंत्र देश की रक्षा हित करने को,
संविधान को अमर करने का जूनून दिखाया है!
आज नूतन नव शक्ति शौर्य पराक्रम लेकर,
देखो,अपना गणतंत्र दिवस फिर आया है !
बसंती पीतांबरा परिधान हमारी मातृभूमि को,
हमारी सुन्दर प्रकृति सृष्टि ने पहनाया है !
इंद्रधनुष मुस्कुराता दिख रहा गगन में,
श्रतुराज ड्योढ़ी पर खड़ा होकर मुस्कराया है !
सक्षम हाथों में सुरक्षित सौप देश को,
जन जन का मन आज हरषाया है !
फिर भी कुछ नामुराद औलादों ने देश में,
बेहद उत्पात और कोहराम मचाया है !
पर देशभक्त विशाल वृहद जनसमूह ने,
अपने गणतंत्र की रक्षा का व्रत अपनाया है !
अब नहीं रुकेंगे हमारे दृढ़ कदम,
हमने लोकतान्त्रिक देश का सपना सजाया है !
छब्बीस जनवरी है एतिहासिक पावन दिन,
आज शुभ गणतंत्र दिवस हमारा है !
आज संपूर्ण जगत में गूॅ॑ज कैसे रहा,
यह शुभ राष्ट्र गीत का गौरव गान हमारा है !
