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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

गणगौर

गणगौर

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चैत्र शुक्ल की तीज को गणगौर तू है, आई

इसदिन घर-घर मे खुशियां ही खुशियां छाई 

सुहागिन स्त्रियों के मुख पर मुस्कान है, आई

पति लंबी उम्र, हेतु गणगौर व्रत करती, भाई


कुंवारी बालाओं ने अच्छे वर हेतु थाल, सजाई

बसंत जैसी खिलती रहे, जीवन की सच्चाई

सुहागिनें मांगती मां उमा से जीवन तरुणाई

चैत्र शुक्ल की तीज को गणगौर तू है, आई


साथ मे खुशियों की बारात लेकर तू, आई

इसरगौर भी कहते है, इसको लोग-लुगाई

प्रकृति मां भी लेती है, इस दौरान अंगड़ाई

पीले-पीले कटी फसलें लगे, जैसे स्वर्ण झांई


मां पार्वती से सब करे, प्रार्थना मिलकर भाई

सबके जीवन से मिट जाये, दुःखों की परछाई

शिव नाम सुमिरण करे, सब करे नेक कमाई

धूमधाम से मनाये, गणगौर पर्व, प्रसन्न करे, माई


चैत्र शुक्ल तीज पार्वती की पीहर से होती विदाई

शिव जी लेने आते पार्वती को 18 दिन बाद भाई

भगवान गणेश जी के जन्म से भी जुड़ी है, सच्चाई

गणेश जन्म हेतु 12 वर्ष तपस्या की पार्वती, माई


चाहे पास न हो पैसा, चाहे पास न हो एक पाई

जिसके हृदय मे जिंदा होती है, अपनी सच्चाई

उसके चित में नित्त ही बजती है, आंनद शहनाई

शांत चित्त रखो, खिलेगी पत्थरो पर कली भाई


जीवन के लक्ष्य में मजबूत है, जिसकी कलाई

उसको कभी झुका न सकती है, कोई भी बुराई

जिसने सँघर्ष की आग में अपनी जिंदगी तपाई

उसके लबो पर कुंदन जैसी मुस्कान चमचमाई


वो सच्चा योद्धा जो जीतता इद्रियों की लड़ाई

इंद्रियों ने प्रकाश को बना दिया अंधेरे का भाई

वो जीतता है, सारी ही दुनिया बिना हाथपाई

जिसने खुद की खुदी की दियासलाई, जलाई


चैत्र शुक्ल की तीज को गणगौर तू है, आई

इसदिन घर-घर मे खुशियां ही खुशियां छाई

ऐसे सजती-सँवरती, जैसे रोशनी अँगने आई

मेहंदी लगा, सुहागिनें मिटाती, दुर्भाग्य परछाई।


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