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SANGRAM SALGAR

Comedy

3  

SANGRAM SALGAR

Comedy

गलती से दोस्ती हो गई

गलती से दोस्ती हो गई

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चाँद को भी तारों का साथ था

शाम को महसूस करके 

हम तो यूँ हीं बैठे थे

और उनसे गलती से दोस्ती हो गई 


अनजान थे,

लेकिन दिल कहां मानता था

उनको बातें करने से डरते थे

वही बात मन में ही छुपा लेते थे 


अपना तो कोई नहीं था

बस फोन का सहारा था

उसने ही आके हाथ थामा था

बातें करते करते उनकी आदत हो गई 

पताही नहीं चला

गलती से ही कब इतनी 

प्यारी सी दोस्ती हो गई.


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