STORYMIRROR

SANGRAM SALGAR

Abstract Classics Inspirational

3  

SANGRAM SALGAR

Abstract Classics Inspirational

हम कहां शायर थे

हम कहां शायर थे

1 min
224

हम कहां शायर थे

बस मन के चार शब्द लिखते थे

पर वो मन भी खाली था

क्योंकी उसमे तुम नहीं थी


ऊन चारो आपके लब्जोंने घायल किया

वरना हम कहां खो जाते

अपनेही दिलको समझाके

युंही भटक जाते


अंधेरी रात में भी

चैंन से सोते थे

तुमसे मिलने से पहले

हम कहां शायर थे


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract