STORYMIRROR

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

4  

हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Romance Classics Fantasy

गीत : जे हम तुम चोरी से

गीत : जे हम तुम चोरी से

1 min
256

पैरोडी : 

तर्ज : जे हम तुम चोरी से बंधे इक डोरी से 

प्रेमी और प्रेमिका प्रेमालाप कर रहे हैं । 

प्रेमिका : 

फरेबी साजन से मेरे मनभावन से नैना हो गए चार 

दिल धक धक करता है यार 

फरेबी साजन से मेरे मनभावन से नैना हो गए चार 

प्रेमी : 

बड़ी हरजाई है क्यों आंख मिलाई है 

अब क्या पछताना यार 

दोनों : फरेबी साजन से बड़े मनभावन से नैना हो गए चार 

अंतरा 1 : 

प्रेमी : 

कैसे लड़ गए नैना, ओ गोरी ये बतला दे 

काहे खोये चैना , मुझको तो ये समझा दे 

सोच समझ 

अरे सोच समझ के गोरी तुझको तो करना था प्यार 

प्रेमिका : फरेबी साजन से मेरे मनभावन से नैना हो गए चार 

अंतरा 2 : 

प्रेमिका : 

चोरी से सपनों में आया और मेरे मन को भाया 

मीठी मीठी बातों से मुझे उसने अपना बनाया 

उसके बिना 

उसके बिना दिल ना लगे मैं करती हूं इकरार 

प्रेमी : बड़ी हरजाई है क्यों आंख मिलाई है

अब क्या पछताना यार 

प्रेमिका : फरेबी साजन से मेरे मनभावन से हो गए नैना चार 

दोनों : फरेबी साजन से बड़े मनभावन से हो गए नैना चार।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance