घर
घर
कुछ यादें लेकर आई हूँ
कुछ बातें करने आई हूँ।
घर किसे कहते हैं
यह सुनाने आई हूँ।
घर में आनंद उल्लास होता है
घर में हंसी मजाक होता है
घर में श्वास लेता विश्वास है
घर में रिश्तों की मिठास है।
घर साज सजा से नहीं बनता
घर सोफा पलंग से नहीं बनता
यह बनता है अपने अरमानो से
यह बनता है रिश्तों के आदर सम्मान से।
सुख के साधन साथ नहीं फिरते
वो दिखावे भर के रह जाते हैं
दीवारें तभी रंगीन होती हैं
जब मिलजुल कर उत्सव हम मनाते हैं।
