STORYMIRROR

Shayra dr. Zeenat ahsaan

Inspirational Others

3  

Shayra dr. Zeenat ahsaan

Inspirational Others

घर चलोगी

घर चलोगी

1 min
323

मैं आज फिर चली अाई थी उनका दर्द बांटने

मैने मां से सुना था जैसा बोओगे वैसा काटोगे


गेट में घुसते ही वो दिखाई दी

आंखों के आंसू सुख के सूनेपन में बदल गए थे

अास्थाए समूची जल गई थी

सपनों का महल धराशाई हो गया था

उम्मीदें खो गई थी

उत्साह ख़तम हुआ लगता था


ज़िन्दगी ढोने की मज़बूरी बस

हर तरफ पसरा था एक सन्नाटा, उदासी

मुझे देखते ही उसके होंठों पर मुस्कान

आंखों में एक चमक अा गई

मेरी निगाहों से निगाह मिलते ही वो भरभरा कर रो पड़ी


मैने उसे उठाकर सीने से लगा लिया

उसकी हिचकी रुकते ही मैने उसके आंसू पोछे और उसे सहारा दिया

फिर मैं मन ही मन संकल्प करते हुए बोली


काकी मां तुम मेरे साथ घर चलोगी

तुम्हारी ये मुंह बोली बेटी अभी ज़िंदा है

उसके होते हुए तुम्हे वृद्धाश्रम में रहने की कोई ज़रूरत नहीं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Inspirational