घोर कलयुग
घोर कलयुग
तेरे आने से पहले ही,
उसने तुझसे प्यार किया ।
ना देखा तेरा रूप तभी से,
तुझको अपना मान लिया।
बस तेरी ख़ुशी के हेतु,
उन्होंने अपने सुख का त्याग किया।
ना समझा कभी उन्होंने की ,
इच्छाए कुछ उनकी भी है।
पर तू बात नहीं समझेगा ,
खून में तेरे गर्मी है।
कहता है तू हक़ है तुझको,
खुद जीवन जीना है मुझको।
हाँ! बात तेरी बिल्क़ुल सच है,
पर कहता तू गलत वक़्त पर है।
तुझको तो ये तब कहना था ,
जब एक अबोध बालक था तू,
तेरी माँ का तू गहना था,
मल-मुत्र देह पर करता था,
कुछ बात नहीं कह पाता था।
जिसने तुझको ये ज़बान दिया,
उनसे ही ज़बान लड़ाता है।
अरे नादान!समझ जा अभी वक़्त है,
कैसा तूने ये खता किया,
वो सच्चा वाला प्यार जिसे ,
बाज़ारो में देखा तुमने।
वो सच्चे वाले प्यार नहीं ,
उस ओहदे को चाहने वाले थे।
जिसको तेरे माँ-बाप ने तुझको,
बिन मांगे है दान किया।
वो सच्चा वाला प्यार नहीं है और कहीं ,
तेरे पास ही है।
जिसने चाहा निःस्वार्थ तुझे,
नादान ! तेरे माँ-बाप ही हैं!
