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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Tragedy

घमंड किस बात का

घमंड किस बात का

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घमंड करते हो प्यारे किस बात का

बंगला-कोठी या धन की सौगात का

सब तेरा यूँ का यूँ ही धरा रह जायेगा,

खाली हाथ आया,खाली हाथ जाएगा


क्यों कर रहे हो घमंड माटी के गात का

खिलौना है,सब माटी की जात का

घमंड करते हो प्यारे किस बात का

सब ही तो समान प्रसाद है ईश्वर का


फिर क्यों यहां पर तुम इतरा रहे हो ?

ये तो किस्सा है,बस एक ही रात का

प्रेम से रहो,भाईचारे के साथ तुम रहो

सबका रूह से रिश्ता है,भाई-भाई का


किसी की सरलता तो खुदा का बल है,

इसे टुकड़ा न समझो किसी खैरात का

घमंड करते हो प्यारे किस बात का

सबका रिश्ता है,यहाँ चँद मुलाकात का


मनुष्य जीवन मिला है तो आंनद करो,

मत करो तुम पाप किसी प्रकार का

करो बस तुम यहाँ खुदा की ईबादत,

यही एक रिश्ता है,जन्म-जन्मान्तर का


घमंड करते हो प्यारे किस बात का

मनुष्य तो बुलबुला है,बस एक बूँद का।


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