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ARVIND KUMAR SINGH

Abstract

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ARVIND KUMAR SINGH

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गद्दार को सजा

गद्दार को सजा

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शर्म हया सब बेच के जिसने

देश द्रोह का पाप किया

जहर भी घेाला नफरत का

आतंक का रास्‍ता साफ किया


साजिश रचाई जिसने हरदम

और मौका पाते ही वार किया

देश को नीचा दिखाने का

हरदम ही जिसने काम किया


गद्दार बन करता आगजनी

देश मेरा धू धू जलता है

गुणगान दुश्‍मन के गाता जो

मेरे देश का खाकर पलता है


देश से बढ़कर होगा क्‍या फिर

क्‍यों फिरकापरस्‍ती वजा मिले

सात पुस्‍तें इसकी भुला न पाऐं

गद्दार को ऐसी सजा मिले।


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