STORYMIRROR

Ajay Gupta

Abstract Drama

4  

Ajay Gupta

Abstract Drama

गांव शहर

गांव शहर

1 min
421

गांव हमारा खुशियों की खान 

हरियाली जिसकी रहती पहचान

मिलते जिसमें हँसते लोग 

किसी को हो कैसे रोग 

शुद्ध हवा हर दम मिलता 


नदी देख मन जो खिलता 

किसी घर में खुशी सुन 

पूरा गांव जश्न मनाने आता 

कोई विपदा कहीं आए 

सारा गांव मिल दूर भगाता 


ऊँची अट्टालिकाओं की पहचान यह शहर 

लाखों लोगों से भरा अकेले रोता यह शहर 

मशीनों से चलता मशीन इंसान का यह शहर 

कहीं धुंआ कहीं तेज आवाज कहीं गंदगी यह शहर 


हर कौने में लड़ते रोग, सुबकती आत्मा यह शहर

छोटे घर के पीछे लड़े भाई साज़िश भरा यह शहर 

चोरी हत्या और नारी से अभद्र व्यवहार यह शहर 

यहां कोई गम नहीं बाँटता अपने मे रोता यह शहर 


पानी बोतलों में है आता नदियों में कचरा यह शहर 

यह कैसा विकास है आया 

समाज अब व्यक्ति मे समाया 

दिखे हज़ारों लोग सदा 

पर कोई किसी को ना भाया। 


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract