गांधी श्रद्धांजलि दिवस
गांधी श्रद्धांजलि दिवस
"राष्ट्रपिता गांधी को सत् सत् नमन् - श्रद्धांजली"
३० जनवरी गांधीजी ७७ वर्ष पूर्व, हे राम! उचर विदा हुए।
हिंदू मुस्लिम जंग बावत, गांधीजी अलविदा कह मौन हुए।
७७वीं पुण्यतिथि पर राष्ट्र नम आंखों से श्रद्धांजलि दे रहा।
दिल्ली के गांधिघाट पर हर राजनेता जुटकर, नत हो रहा।
निधन पश्चात संपूर्ण राष्ट्र शोकग्रस्त, जन मानस रोया था।
ग़म में तब प्रधानमंत्री नेहरु ने, राष्ट्र नावें संदेश दिया था।
राष्ट्र की रोशनी बुझी, अंधकार चहुंओर नैराश्य फैल गया।
फादर ऑफ नेशन गमन से स्वातंत्र्य स्वप्न चूर चूर हो गया।
द्वितीय विश्वयुद्ध, विदेश से 'आजाद हिंद फौज' ललकारी।
नेता सुभाष चंद्र बोस का स्वतंत्रता युद्ध ऐलान, थी तैयारी।
पैगाम गुंजित, फिरंगियों का छक्का छुटा, गरज उठी सेना।
तभी नेताजी सुभाष का सिंगापुर में, प्रभावी संबोधन देना।
गांधी को प्रथमत:, 'फादर ऑफ नेशन' नाम से पुकार पाए।
उसी कड़ी में, नेहरू निधन पश्चात, 'राष्ट्रपिता' भी कहलाए।
गांधी के जाने से, राष्ट्र कई मायने में चौराहे पर अटक गया।
शासन विरुद्ध सन् सत्तावन में कई उतार एवं चढ़ाव आया।
कांग्रेस ने स्वतंत्रता युद्ध को, विहंगम मुकाम तक पहुंचाए।
घर घर चरखा, अहिंसा का देशव्यापी आंदोलन चलवाए।
नेता सुभाष चंद्र बोस, अलग से लड़ाई को, दी थी ताकत।
युवा क्रांतिकारी दल नेता, चंद्रशेखर आजाद बने आफत।
शहीदे आजम सरदार भगत सिंह, राजगुरु; सुखदेव आए।
यतींद्रनाथ दास, दुर्गाजी, अशफाक उल्ला खान भी छाए।
खुदीराम बोस जैसे युवक, अंग्रेजो का हौसला पस्त किए।
खजाना लूटा, बम बारूद का धुआं उठा, फिरंगी दंग हुए।
सच्ची ताकत गांधी के द अफ्रीका आंदोलन से लौटने पर।
चंपारण सत्याग्रह आंदोलन गांधी का, आंधी ब्रिटिशों पर।
चंपारण सत्याग्रह सफल, आसमान की ऊंचाईयां मिली।
गांधी सत्याग्रह बगैर अस्त्र-शस्त्र, असहयोग शक्ति मिली।
अंग्रेज नत देख कांग्रेस '२९ लाहौर अधिवेशन आयोजन।
पूर्ण स्वाधीनता संकल्प, आजादी हेतु १ वर्षीय संयोजन।
उसी दिन रावी तट पर मध्यरात्रि जश्न, स्वाधीनता दिवस।
भव्य झंडोत्तोलन, आजादी १८ साल पश्चात शुभ दिवस।
१५ अगस्त '४७ को आजादी, ६ माह में हत्या गांधी की।
देश दिशाहीन, गांधी आंदोलन, लड़ाई हुई आजादी की।
चंपारण व अन्य हिस्सों में, गरीबी के आलम को रे देखा।
गांधी टाई उतार बने फकीर, मिटाई छुआछूत की रेखा।
तन पर एक खादी धोती, गोली लगी तो वही लिपटा था।
काश संत मार्ग दर्शक होते, दुःख से सारा विश्व रोया था।
गांधी के स्मृति- चरणों में हमारा नमन, देते श्रद्धांजलि!!
गांधी घाट अश्रुपूरित, हर राष्ट्रवादी नत, दें पुष्पांजलि!!
