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Pradeep Sahare

Tragedy

4  

Pradeep Sahare

Tragedy

एकाकीपन

एकाकीपन

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एकाकीपन नहीं ,

नहीं है कोई वहम।

सच कहूं तो !

एकाकीपन में,

बेचैनी है ज्यादा।

तकलीफ ,

कुछ ज्यादा,कम।

एकाकीपन और मन।

समझता ज्यादा कौन?

जो देते एकाकीपन !

शायद नहीं...

समझती हैं वह,

छत की तरफ,

एक टक आँखे ।

चादर की सलवटे।

सियाने का तकिया,

जो बार बार,

बदलता अपनी जगह।

सुबह के इंतजार में,

शायद कुछ हो,

अच्छा...


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