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Saraswati Aarya

Romance

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Saraswati Aarya

Romance

एक सपना

एक सपना

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जिनको हकीकत में देखने को तरसते थे

उनका सपने में दीदार हुआ

कैसे बताये, कैसे छुपाये

वे बोले ,हमको तुमसे प्यार हुआ

सूरज की ठिठोली, चंदा की बोली

इन नयनों में भरपूर है

न जाने किस गली, किस घर

वो प्यार बहुत दूर है

एक आहट जो सपने में सही एक खुशी रही

मुझ पर बहुत बड़ा उपकार हुआ

वैसे सपने कई धुंधले होते 

पर वो चाँदी जैसा उजला था

रात्री का वो एक पहर

पर मेरा सूरज निकला था

आज मेरे दिल के आँगन में

रोशन एक अंधकार हुआ

जी चाहता था 

उस सपने में डूबी रहूँ

मैं सुबह शाम

मेरे दिवस, मेरे लम्हें, मेरा जीवन

बीत जाये उसमें तमाम

बिन रिश्तों ,बिन नातों के

बिन बातों, बिन मुलाकातों के 

हाय यह कैसा इकरार हुआ।



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