Hricha Patel
Romance
नयनों ने नयन को है जबसे छुआ...
अनकही दास्तां पर कुछ तो हुआ...
खुद से ही बातें करने लगे...
मन ये पक्षी बना बावरा सा हुआ....!
तुम अभी ठहरो ...
कैसे तुझे बता...
तेरा साथ
उन्हें हम पर ...
एहसास
वृद्धावस्था
आ जाते तुम यहीं पर जहां मिले थे हम जीवन भर साथ साथ चलने के वायदे को ले. आ जाते तुम यहीं पर जहां मिले थे हम जीवन भर साथ साथ चलने के वायदे को ले.
पायल छनकी, चूड़ी खनकी! बात अधर पर, रह गई मन की! पायल छनकी, चूड़ी खनकी! बात अधर पर, रह गई मन की!
वो लम्हे कितने हसीं हुआ करते थे जब तुम्हारे हाथ हमें छुआ करते थे। वो लम्हे कितने हसीं हुआ करते थे जब तुम्हारे हाथ हमें छुआ करते थे।
चलो पहनू मैं खूबसूरत सा जोड़ा,तुम पहनो शेरवानी। चलो पहनू मैं खूबसूरत सा जोड़ा,तुम पहनो शेरवानी।
जिंदगी यूं ही खो न जाए कहीं, संग बस प्रेम से निभाना प्रिये। जिंदगी यूं ही खो न जाए कहीं, संग बस प्रेम से निभाना प्रिये।
मेरी आभूषण तुम हो प्रिय नाम तुम्हारा कंचन है. मेरी आभूषण तुम हो प्रिय नाम तुम्हारा कंचन है.
एक साँवला और एक गोरी, जैसे चाँद और चकोरी। एक साँवला और एक गोरी, जैसे चाँद और चकोरी।
मंगल परिणय हो गया तुमसे, अब मेरा परिवार हो तुम। मंगल परिणय हो गया तुमसे, अब मेरा परिवार हो तुम।
तुम हमारी अच्छी दोस्त होती तो कितना अच्छा होता.. तुम हमारी अच्छी दोस्त होती तो कितना अच्छा होता..
वक्त क्या बदला तू भी बदल गई मैं आज भी वही हूँ जो कल तलक था। वक्त क्या बदला तू भी बदल गई मैं आज भी वही हूँ जो कल तलक था।
सोना -चांदी, हीरे -मोती ये सारे तो फीके हैं आपसे जो मुझे मिला है वो बहुत अनमोल है सोना -चांदी, हीरे -मोती ये सारे तो फीके हैं आपसे जो मुझे मिला है वो बह...
केश तुम्हारे मेघों में भी, नवल छटा भर जाएंगे। केश तुम्हारे मेघों में भी, नवल छटा भर जाएंगे।
मैं तो आज भी वही हूँ जो कल था। मैं तो आज भी वही हूँ जो कल था।
ये वादियाँ क्या कहती हैं..? सुनो ध्यान से। ये वादियाँ क्या कहती हैं..? सुनो ध्यान से।
इश्क किया है मैंने तुमसे तुम ही जिंदगी की डोर हो. इश्क किया है मैंने तुमसे तुम ही जिंदगी की डोर हो.
तुम कहो तो बोले हम, किस्सा एक सुनाना था. तुम कहो तो बोले हम, किस्सा एक सुनाना था.
सिर्फ अकेले तुम, तुम मेरा पूरा परिवार हो I तुम हो तो मैं संपूर्ण हूँ। सिर्फ अकेले तुम, तुम मेरा पूरा परिवार हो I तुम हो तो मैं संपूर्ण हूँ।
पुराने नीम के साये में बचपनें के दिन जो साथ खेलकर गुज़रे थे। पुराने नीम के साये में बचपनें के दिन जो साथ खेलकर गुज़रे थे।
उस बेवफा का हर पल , मुझे इन्तजार क्यों हैं। उस बेवफा का हर पल , मुझे इन्तजार क्यों हैं।
जब माना मैंने तुमको ही, तो क्यों अब जाए ये हाथ खाली! जब माना मैंने तुमको ही, तो क्यों अब जाए ये हाथ खाली!