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Krishna Khatri

Romance

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Krishna Khatri

Romance

दूर ही से ,,,,,

दूर ही से ,,,,,

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ऐ जानेमन,

जब भी देखा तुझे

पलकें भूल गई झपकना 


जब भी छुआ तुझे

सांसें रुक गई

जब भी सुना


तेरी खनकती आवाज को 

धड़कनें थम गई 

और मैं


असमंजस में डूबी 

तुझे दूर ही से 

देखती रह गई !


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