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Suraj Kumar Sahu

Tragedy Others

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Suraj Kumar Sahu

Tragedy Others

दुर्घटना वाली मौत पर

दुर्घटना वाली मौत पर

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चार पैसे कमाते कमाते गई, 

जान सस्ती थी सबको रूलाते गई, 


सोचा जाऊंगा लौट जब घर को, 

जख्म दूंगा नहीं किसी उम्र भर को। 


मगर मौत पर बस मेरा न रहा, 

शाम तो हुई मगर सबेरा न रहा। 


घर से निकला ही था कमाई के लिए, 

मौत बैठी थी मुझसे लड़ाई के लिए, 


हार कर जब गले मैं उसके लगा, 

छाती पे वार जरा कसके लगा। 


सह सका न मैं दर्द रहा सका न जिंदा, 

मौंत आई पिजड़ें से उड़ गया परिंदा। 


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