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Mohinder Kaur (Moni Singh)

Abstract

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Mohinder Kaur (Moni Singh)

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दुर्दशा

दुर्दशा

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बेटियों को बचाने की मुहिम

हो जाती है असफल

जब, दूधमुंही बच्चियों का

उनके ही पिता, भ्राता द्वारा

किया जाता है

शारीरिक व मानसिक शोषण।


क्यों नहीं पढ़ा पाते

इन दुशासनों के माता पिता

नैतिकता का पाठ ?

क्यों नहीं सिखाते स्त्री का आदर ?

राधा, सीता, मीरा

क्यों नहीं बनती इनकी प्रेरणा ?


जागो, उठो, पालकों !

जन्म देना ही तुम्हारा न काम

कुसंस्कारों से बचाकर

सही मार्गदर्शन भी

तुम्हारा ही काम।


बेटों को सही राह दिखाओ

अपनी बेटियों को दुर्दशा से बचाओ।


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