STORYMIRROR

Mohinder Kaur (Moni Singh)

Abstract

3  

Mohinder Kaur (Moni Singh)

Abstract

दुर्दशा

दुर्दशा

1 min
261

बेटियों को बचाने की मुहिम

हो जाती है असफल

जब, दूधमुंही बच्चियों का

उनके ही पिता, भ्राता द्वारा

किया जाता है

शारीरिक व मानसिक शोषण।


क्यों नहीं पढ़ा पाते

इन दुशासनों के माता पिता

नैतिकता का पाठ ?

क्यों नहीं सिखाते स्त्री का आदर ?

राधा, सीता, मीरा

क्यों नहीं बनती इनकी प्रेरणा ?


जागो, उठो, पालकों !

जन्म देना ही तुम्हारा न काम

कुसंस्कारों से बचाकर

सही मार्गदर्शन भी

तुम्हारा ही काम।


बेटों को सही राह दिखाओ

अपनी बेटियों को दुर्दशा से बचाओ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract