दुनिया की रीत
दुनिया की रीत
दुनिया की रीत को समझना होगा,
जो जैसा है उसके साथ वैसा करना होगा,
अच्छा बनना अच्छी बात है,
लेकिन बुरों के लिए बुरा बनना होगा,
दुनिया की रीत को समझना होगा।
क्या श्री राम अच्छे नहीं थे,
रावण के लिए कठोर बनना पड़ा,
क्या श्री कृष्ण अच्छे नहीं थे,
लेकिन दुर्योधन के लिए कठोर बनना पड़ा,
दुनिया की रीत को समझना होगा,
जो जैसा है उसके साथ वैसा करना होगा।
दयालु उनके लिए बने जो इसके लायक है,
मददगार उनके लिए बने जो इसके लायक है,
दया हत्यारों के लिए ना हो तो अच्छा हो,
माफी बलात्कारियों को न मिले तो अच्छा है,
इनके लिए शस्त्र उठाना पड़ेगा,
इनके लिए कठोर बनना होगा,
दुनिया की रीत को समझना होगा,
जो जैसा है उसके साथ वैसा करना होगा।
रात के बाद सुबह होती है जरूर,
गंदगी को सफाई से दूर करना होगा,
भ्रष्टाचारियों को भगाना है इस देश से,
शिक्षा से उन्हें लड़कर भगाना होगा,
जन्म लेना अच्छी बात है,
लेकिन जन्म लेकर श्री राम और श्री कृष्ण जैसा,
दुष्टों का अंत करना होगा,
दुनिया की रीत को समझना होगा,
जो जैसा है उसके साथ वैसा करना होगा।
