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Kumar Ritu Raj

Abstract Others


3.9  

Kumar Ritu Raj

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दुनिया चमत्कार चाहते हैं

दुनिया चमत्कार चाहते हैं

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दुनिया चमत्कार चाहते हैं

ना इंकार चाहते हैं,

ना इंतजार चाहते हैं . . .


कभी शांति को सैलाब सा,

कभी हिंसा को श्मशान सा

कभी प्यार पे हक़दार सा,

कभी रिश्ते पे मेहरबान सा

दुनिया चमत्कार चाहते हैं . . .


ना दूसरों कि तरक्की हो

ना दूसरों कि खुशी

बस वो खुश रहे

हो ऐसी जिंदगी

दुनिया चमत्कार चाहते हैं . . .


ना मेहनत कि आस हैं

ना अपनों पे विश्वास हैं

इन भोली शक्लों पे एक झूठी मुस्कान है

ये बस, तेरे दर्द का इम्तिहान चाहते हैं . . .


दुनिया चमत्कार चाहते हैं

ना इनकार चाहते हैं, ना इंतजार चाहते हैं . . .


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