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Abhijit Tripathi

Tragedy

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Abhijit Tripathi

Tragedy

दशकंधर का संहार करो

दशकंधर का संहार करो

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हर जगह मची चीत्कार हिन्द में,

आज बज रहा आतंक का डंका।

हर दिल में है रावण कोई,

हर घर बना पाप की लंका।।

इस लंका पर रघुनंदन अब

आकर तुम अधिकार करो।

धनुष-बाण ले दशकंधर का

राम तुम्ही संहार करो।।


मधुबन के फूल सभी अब

सूख गए हैं रेतों में।

आज भी देखो पड़ी है सीता

जनकराज के खेतों में।

भले लक्ष्मी-दुर्गा कहकर

बेटी को यहां बुलाते हैं।

पर राम इसी भारत में

जिंदा उन्हें जलाते हैं।

रघुवर अब आशाओं के

बंधन सारे टूट रहे।

मासूम बेटियों की इज्ज़त

यहां दरिंदे लूट रहे।

हर गली अहिल्या बैठी है

उसका तुम उद्धार करो।।

धनुष-बाण ले दशकंधर का

राम तुम्ही संहार करो।।


भूल गए हैं लोग यहां तुम

सबको हँस करके गले लगाते थे।

राम नहीं अब याद किसी को

तुम शबरी के बेर भी खाते थे।

हे राम तुम्हारे भारत में

अब बंद बुलाया जाता है।

वाल्मीकि वंशजों द्वारा तेरा

होना झुठलाया जाता है।

सुग्रीव-जामवंत रहे नहीं,

ना ही केवट की गंगा है।

जिधर नजर मैं उठा के देखूं,

बस जातिवाद का दंगा है।

वक्त आ चुका, मूढ़मतों का

कुछ तो अब उपचार करो।।

धनुष-बाण ले दशकंधर का,

राम तुम्ही संहार करो।।



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