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Mahak Garg

Inspirational

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Mahak Garg

Inspirational

दृढ़ निश्चय

दृढ़ निश्चय

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तू चाहे या न चाहे

सूरज का उदय तो

रोज़ होगा

तू चाहे या न चाहे

चाँद अपनी रौशनी

ज़रूर बिखेरेगा

तू चाहे या न चाहे

बारिश की बूँदें सारा

जग चूमेंगी


तू चाहे या न चाहे

ये नदिया तो बहती रहेगी

तू चाहे या न चाहे

मिट्टी अपनी महक

बिखेरती रहेगी


तू चाहे या न चाहे

ये पृथ्वी तो गोल ही घूमेगी

ऐ इंसान, तू दृढ़ निश्चय तो कर

एक दिन यह दुनिया तेरे

भी राग गाएगी

किसी के कहने से रुक मत,

झुक मत

यही एक दिन तुझे तेरी मंज़िल

तक पहुँचाएगी 


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