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Mahak Garg

Abstract


4.5  

Mahak Garg

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अनमोल दुआ

अनमोल दुआ

1 min 215 1 min 215

निराशा के सफ़र में

एक दुआ भी साथ चलती है

जहाँ भी हो अंधकार

दीप बन रोशनी भरती है।


नाकाम हो सारी कोशिशें जहाँ

दुआ ही एकमात्र मार्ग बनती हैं

जब - जब दुखों के बादल छाये

इंद्रधनुष बन रंग बिखेरती है ।


उम्मीदों का सूरज ढल जाए जब

एक दुआ ही नया सवेरा जगाती है

उदासी भरी धूप में

छाँव बन शीतलता देती है।


जब देने को कुछ न हो

एक दुआ ही अनमोल तोहफा होती है

जब घुटने टेक दें दवाएं

आस्था बन विश्वास जगाती है ।


निकली जो दिल से हो

एक दुआ आराम पहुँचाती है

खुदा जो क़ुबूल कर जाए

जिंदगी को नया जीवन प्रदान करती है।



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