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Mahak Garg

Abstract


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Mahak Garg

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जंजीरे

जंजीरे

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कैसी है रे तू !

भला नहीं किया तूने,

तो बुरा भी मत कर ।

हर किसी को जकड़ा है तूूने

क्या किया ये तूने ?


आतंकवाद के जंजाल में

भ्रष्टाचार की भूलभुलैया मेें,

भेदभाव की हथकड़ियो में,

पति - पत्नी को अलग करती है,

बाप-बेेेटे को बिछडाती है

सारे रिश्ते तोड़ दिए तूने ।

क्या किया ये तूने ?


गुनहगार के पैरो की धूल है तू

निर्दोष के सर का ताज है तू

सब खत्म कर दिया तूूूने ।

क्या किया ये तूने ?

क्यों किया ये तूने ?


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