STORYMIRROR

कवि धरम सिंह मालवीय

Abstract

4  

कवि धरम सिंह मालवीय

Abstract

दर्द पर मुस्कुराना नही चाहिए

दर्द पर मुस्कुराना नही चाहिए

1 min
211


हाल सबको सुनाना नहीं चाहिए

बात दिल की बताना नहीं चाहिए


हो सके तो घायलों का सहारा बनो

दर्द पर मुस्कुराना नहीं चाहिए


प्यार में दर्द तुम्हे मयस्सर हुआ

अश्क आखों में आना नहीं चाहिए


मतलबी हैं जहाँ मतलबी लोग हैं

दिल किसी से लगाना नहीं चाहिए


 राज पहुंचे हमारे भी गैरों तलक

बात अपनी सुनाना नहीं चाहिए


जो जला ना सको प्यार का इक दिया

धरम बस्ती भी जलाना नहीं चाहिए!


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract