दोहा छंद..
दोहा छंद..
"जननी जनती बाल को, गर्भ धरे नव माह ।
तू भी मेरा अंश है, कैसे करूं मैं आह ।।"
"ऑंसू सारे बह गए, जैसे सरिता सोख ।
तुझ बिन सूना सब यहाॅं, सूनी है मम कोख ।।"
"आंखें तरसे देख तो, देख रही है राह ।
ढूंढते तुझे हर गली, मुझको तेरी चाह ।।"
