STORYMIRROR

AVINASH KUMAR

Romance

4  

AVINASH KUMAR

Romance

दिलबर मेरा

दिलबर मेरा

1 min
372

हर घड़ी ख़ुद से उलझना है मुक़द्दर मेरा 

 मैं ही कश्ती हूँ मुझी में है समंदर मेरा 

 

 किससे पूछूँ कि कहाँ गुम हूँ बरसों से 

 हर जगह ढूँढता फिरता है मुझे घर मेरा 

 

 एक से हो गए मौसमों के चेहरे सारे 

 मेरी आँखों से कहीं खो गया मंज़र मेरा 

 

 मुद्दतें बीत गईं ख़्वाब सुहाना देखे 

 जागता रहता है हर नींद में बिस्तर मेरा 

 

 आईना देखके निकला था मैं घर से बाहर 

 आज तक हाथ में महफ़ूज़ है पत्थर मेरा


भटकती रहती है रूह मेरी जिसके लिए

अब वो आएगा कसम से दिलबर मेरा|


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance