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Monika Kandala

Romance Classics Others

4.0  

Monika Kandala

Romance Classics Others

दिल पर लिपटी हुई तुम !!

दिल पर लिपटी हुई तुम !!

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तारीखो.. को याद रखने की जरूरत क्यू हे मुझे... 

तुम मेरी जिंदगी में रोज नई तरीख बनकर आती हो...


उन तारीखो... को हर बार जीने की ज़रूरत क्यू हे मुझे... 

तुम उन ही तारीखो पर नई रंग लाती हो...


रूट थी हो तुम.... इस बात से हे की आपको तारीख याद नहीं रहती... 

मैं कहता हू की उन तरीखो की... मेरी जिंदगी में बारात लेकर आती हो...


तुम न समजो... की वो पल मेने भुला दिया... 

वो मेरे दिल पार्थो मैं लिपटे हुए हे...

ज़ोर से.. खिचो तो आवाज बनकर निकलेंगे...


तुम ना समजो... की ये तुम्हारी बात नहीं सुनता... 

दिल की मुश्किल... कभी... उस पर हावी होती हे... 

पर खंबाख्त दिल भी मेरी नहीं सुनता...


तुम को सुनकर... बात कान पर नहीं जाती कभी... 

पर रास्ते ए दिल जरुर टकर जाती हे...


तेरी नारजगी झायेज़ हे... तेरा गुस्सा भी झायेज़ हे... 

पर मुझ पर भरोसा कर... ये सब मेरे दिमाग की आहट हे...


रोक्टा हू... सोच ने से अपने दिमाग को…

क्यू की दिल अकेला इन राहो को ताई नहीं कर सकता... 

क्यू की उस पर तेरी प्यार की इनायत हे...



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