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Bhawana Raizada

Romance

4  

Bhawana Raizada

Romance

दिल की गली

दिल की गली

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दिल की गलियों से निकलकर

कभी सामने तो आजा न।


कभी मेरे ख्वाबों को हकीकत

में तो बदल के देख न।

तेरे नाम की माला जो मुख पर चढ़ी है

उसे कभी स्वरूप तो दे न।


हम तो खड़े हैं अपनी पलकें बिछाये

कभी साथ मेरे बैठ तो न।

दिल की गलियों से निकलकर

कभी सामने तो आजा न।


तेरे बातों की झड़ी बरसती है हर पल

मेरा नाम भी तो कह दो न।

तरसते रहते हैं हम एक झलक को तुम्हारी

कभी सामने से गुज़र तो न।


दो पल बैठ पहलू में बैठो तो मेरे

जीवन यूँ ही बीता दो न।

दिल की गलियों से निकलकर

कभी सामने तो आजा न।


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