STORYMIRROR

VIVEK ROUSHAN

Abstract

3  

VIVEK ROUSHAN

Abstract

दिल कि बातें दिल ही जाने

दिल कि बातें दिल ही जाने

1 min
287

दिल कि बातें दिल ही जाने

तुम क्या जानो हम क्या जाने


इश्क़ भी एक रोग है प्यारे

ये जात न देखे मजहब न माने


पढ़ा बुज़ुर्गों को तो मालूम हुआ 

इश्क़ में डूब गए कितने दीवाने


रुसवा हुए हम जिसकी खातिर

वो आया नहीं  मुझे  मनाने


चराग लिए निकला मैं घर से

रात चाँद आया था मुझे जगाने


सब  डूबे  हैं अपने गम में

अब कौन यहाँ किसको पहचाने 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract