STORYMIRROR

Chandni Purohit

Abstract Inspirational

4  

Chandni Purohit

Abstract Inspirational

दिल धड़कन और तुम

दिल धड़कन और तुम

1 min
313

जाने मन मेरा किस सोच में डूबा जाने कहाँ है गुम 

विचलित जिया टकटकी लगाए निहार रहा कहीं शून्य 


समुन्द्र मंथन सा हो रहा दिल मेरा चारों तरफ सिर्फ तुम 

गुनाह किया क्या दिल्लगी करके या किया मैंने कोई पुण्य 


इनायत खुदा की मिलतीं नसीब वालों को बजने लगी धुन 

लौट आ मेरे रहनुमा जल्दी से इंतज़ार के पल बीते अगण्य


सरग़म नयी नित गूंजे शहनाई बसे दिल धड़कन में हम-तुम 

हर पल जाऊँ तुझपे वारी वारी मेरा तू दिलबर हूँ मैं तेरी सरगुन।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract