STORYMIRROR

नम्रता सिंह नमी

Abstract

4  

नम्रता सिंह नमी

Abstract

दीया

दीया

1 min
411

अंधेरी रात को चीरता

ये दीया बहुत ढीठ है


लाख आंधियां हो

तूफान कितना भी

जोर पर क्यों न हो

ये नन्हा सा दीया तो जलेगा


ये है आस का दीया

हमारी उम्मीद का दीया

तम को मात देगा

हमारे संबल का दीया...


कुछ यूं भरा है

हमने दीये में

अपने अरमानो को

ये लड़ के रहेगा

ये जी के रहेगा....



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from नम्रता सिंह नमी

Similar hindi poem from Abstract