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Yogesh Shukla

Tragedy

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Yogesh Shukla

Tragedy

दीवाली

दीवाली

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ये रात रोशनी वाली है मगर है किस्मत में अंधियारा

ना सोचे थे कि कभी गम का बादल आये

पर ना आया कभी खुशियों का सवेरा,

जुदाई तो लिखी ही थी इन हाथों के लकीरों में

ना है क़सूर तेरा ना है कसूर मेरा…


अनोखे सजावटों में सजी आज की दीवाली है

हर गली है रोशन हर तरफ खुशहाली है,

यूँ तो नज़ारों से भरी है ये शाम

पर तू साथ नही तो जैसे सब खाली-खाली है....


काश तू आए और खत्म हो ये इंतज़ार के लम्हे,

की "आज़ाद" तेरे बगैर सूनी-सूनी सी ये दिवाली है।...


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