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Yogesh Shukla

Others

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Yogesh Shukla

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दर्द

दर्द

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रोने ही लगा था पलकों पे आकर हर अश्क ठहर गया,

खोने ही चला था खुद को किनारे तक जा कर हर क़दम ठहर गया.


मिलने ही लगी थी खुशियां बेशुमार ना जाने क्यूं ये वक्त ठहर गया,

करने ही लगा था एक गुनाह पर जाने क्यूं हौसला बिखर गया.


बदलने ही चला था ख़ुद अपनी क़िस्मत क़िस्मत का

सबसे तेज़ सितारा करवट बदल गया,

पीने ही चला था इक जाम-ए-हसीं आशिकी पैमाना-ए-इश्क़ छलक गया.


खो गया "आज़ाद" भी निगाहों की बेकसी में

वो जो थामे था दिल मेरा उसका दिल भी पिघल गया....



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