STORYMIRROR

Sajida Akram

Abstract

3  

Sajida Akram

Abstract

धरा... #19 दिन वसुधैव कुटुम्ब

धरा... #19 दिन वसुधैव कुटुम्ब

1 min
413

बसंत में धरती ने 

बसंती फूलों से किया,

श्रंगार, पीले फूलों को

बनाया है अपने गहनें

ओढ़ी है धानी चुनरियां, 

ऐ धरा तुम हमें धन-धान्य, 

से प्रखरता देती हो

तुम्हारी असीम प्रकृति

निखार देखकर लगता है

तुमने ओढ़ी है धानी, 

चुनरियां, तुम हो, 

हमारी अन्नपूर्णा, 

हे धरा तुम हो हमारी

वसुधैव कुटुम्बृ


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract